Johar University: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज होने की संभावना है। सरकारी विभागों के बजट से विश्वविद्यालय के भवनों का निर्माण कराए जाने के आरोपों की जांच लगभग पूरी होने की बात सामने आई है। अब ईडी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विश्वविद्यालय के 38 भवनों को जब्त करने की प्रक्रिया में जुटा है। हालांकि, कार्रवाई की अंतिम स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। 38 भवनों पर कार्रवाई की तैयारी जांच के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी विभागों से मिली धनराशि के कथित इस्तेमाल और जौहर ट्रस्ट को चंदे के रूप में रकम दिए जाने की पड़ताल की जा रही है। इस मामले में पूर्व मंत्री आजम खां समेत कई लोगों के खिलाफ रामपुर में एक और एफआईआर दर्ज कराई गई थी। ईडी ने इस मामले को अपनी जांच में शामिल किया है। आजम खां के करीबी अनवर से पूछताछ रिपोर्ट के अनुसार, ईडी आजम खां के करीबी अनवर से पूछताछ करने की तैयारी में है। आरोप है कि अनवर ने ए एंड एस एसोसिएट्स नाम से एक कथित डमी फर्म बनाई थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण के लिए मिली रकम को इस फर्म के जरिए जौहर ट्रस्ट को चंदे के रूप में दिया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पहले भी दिया गया था भवन गिराने का आदेश इस मामले में मुरादाबाद के जिलाधिकारी ने सरकारी धनराशि से निर्मित भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। हालांकि, आदेश के खिलाफ कमिश्नर के समक्ष अपील किए जाने के बाद मामला लंबित बताया जा रहा है। अब ईडी की संभावित जब्ती कार्रवाई से विश्वविद्यालय के भवनों का मामला फिर चर्चा में आ गया है। 45 करोड़ के खर्च और 494 करोड़ के मूल्यांकन का अंतर आयकर विभाग की जांच में भी भवनों के निर्माण को लेकर अहम अंतर सामने आया था। जौहर ट्रस्ट ने निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था, जबकि विभागीय मूल्यांकन में भवनों की कीमत लगभग 494 करोड़ रुपये आंकी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में ट्रस्ट पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की कर देनदारी का सवाल भी उठ सकता है। अब निगाहें ईडी की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर हैं। ये भी पढ़ें: आजम थे, हैं और रहेंगे… जेल में मुलाकात के बाद अखिलेश का BJP पर वार